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ये एक छोटा सा प्लॉट लिया है इंटरनेट पर लिखने के लिए।

गोवा के बीच पर घूमते हुए मैं अपने नए-नए बने दोस्त की बातें सुन रहा था कि मेरी नज़र एक लड़की से मिली, जो मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मुझे जानती हो। मैंने एक बार दूसरी तरफ़ देखकर फिर उसकी ओर देखा — वो अभी भी मेरी तरफ़ ही देख रही थी। उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आ गई थी। पता नहीं क्यों, मैं अपने नए दोस्त की बातों में मशगूल होकर आगे बढ़ गया।

थोड़ी दूर चलने के बाद मुझे आधा संतरा गीली रेत पर गिरा हुआ दिखाई दिया। कुछ ही सेकंड में मेरे दिमाग़ ने मुझे मेरे बचपन की एक दोस्त की तस्वीर दिखा दी — जिसे संतरे खाना बहुत पसंद था। उस दोस्त की मुस्कुराहट बिल्कुल वैसी ही थी जैसी मैंने कुछ देर पहले देखी थी। मेरी आँखों ने उसे दोबारा ढूँढने की बहुत कोशिश की, पर वो फिर दिखाई नहीं दी।