Silent Obsession

प्रमिला और रवि लिविंग रूम की फ़र्श पर बैठे थे, हँसते हुए बोर्ड गेम खेल रहे थे। उसके दो छोटे बच्चे दूसरे कमरे में कार्टून देख रहे थे, बिल्कुल अनजान उस तूफ़ान से जो उनकी ज़िंदगी में आने वाला था। थोड़ी देर बाद, रवि ने प्रमिला के गाल पर किस किया और उठ खड़ा हुआ।

“कल फिर मिलते हैं, जान,” उसने धीरे से कहा।

जैसे ही रवि गया, रमेश घर में दाखिल हुआ। प्रमिला, जो अभी भी थोड़ी शर्माई हुई थी, जल्दी से नार्मल हो गई।

“आज जल्दी आ गए?” उसने मुस्कराते हुए पूछा।

“हाँ, सोचा तुमसे मिल लूँ,” रमेश ने प्यार से जवाब दिया। उनकी बातचीत नॉर्मल और अफेक्शन से भरी थी। वो दिखने में बहुत प्यार से पेश आ रहा था, लेकिन जैसे ही प्रमिला गुनगुनाते हुए किचन में गई, रमेश का चेहरा एक पल के लिए थोड़ा सख़्त हो गया—जैसे कुछ अनकहा सा था उसके अंदर।

उधर रवि अपने दोस्त संजय के साथ बाहर बैठा था, ज़ोर-ज़ोर से डींगें मारते हुए।

“भाई, प्रमिला क्या चीज़ है! क्या रंग दिखाती है बिस्तर में,” वो हँसते हुए बोला।

संजय थोड़ा असहज हो गया।

“बंद कर ये सब, रवि। अच्छी बात नहीं है। शादीशुदा है वो।”

एक शाम रवि फिर प्रमिला से मिला और उसे मनाने की कोशिश की कि वो उसके साथ भाग चले।

“चल भाग चलते हैं, सब छोड़ के,” वो बोला।

प्रमिला ने भौंहें चढ़ाईं।

“पागल है क्या? मैं उन्हें छोड़ के कहीं नहीं जा रही। मुझे मेरे बच्चे और पति दोनों से प्यार है। बस तू बड़ा सेक्सी लगता है, इसलिए मिलती हूँ।”

पर रवि पीछे नहीं हटा। गुस्से में उसने प्रमिला का चेहरा पकड़ लिया।

“अगर तूने मुझे छोड़ दिया ना, जान से मार डालूँगा,” उसका लहजा डरावना था, लेकिन अजीब तरीक़े से प्यार भरा भी।

दरवाज़े के पास खड़े बच्चे ये सब चुपचाप देख रहे थे—बिना कुछ समझे, बिना कुछ बोले।

कुछ दिन बाद रमेश को शक होने लगा। एक रात दोनों के बीच बहुत ज़ोर की बहस हुई, पर कोई नतीजा नहीं निकला। अगली सुबह रमेश ने कहा कि उसे एक छोटा ट्रिप पे जाना है। जाने से पहले उसने एक पल लिविंग रूम में बने छोटे से स्टोरेज स्पेस को घूरा।

“मैं एक हफ़्ते के लिए जा रहा हूँ,” उसने प्रमिला से कहा।

जैसे ही वो मुड़ा, उसका बेटा उसी स्टोरेज स्पेस से बाहर कूद पड़ा, हँसते हुए। रमेश चौंक गया।

उसी रात प्रमिला अपने बेडरूम में रवि के साथ थी—प्यार करते हुए। लेकिन उन्हें पता नहीं था कि कोई उस क्रॉल स्पेस में छिपा हुआ था… और सब कुछ रिकॉर्ड कर रहा था।

अगली सुबह प्रमिला की लाश उसके कमरे में मिली—गला घोंटा गया था। बच्चों ने उसकी बॉडी देखी थी और सदमे में थे।

पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन शुरू की। रमेश, जो अभी-अभी लौटा था, ने कहा कि वो शहर से बाहर था।

रवि के शरीर पर ज़ख्म थे—उसका सिर बँधा हुआ था और चेहरे पर खरोंचें थीं।

पुलिस ने पूछा:

“ये चोट कैसे लगी?”

“गिर गया था बाइक से,” रवि ने बड़बड़ाया।

बच्चों से भी सवाल किया गया, लेकिन वो कुछ भी कहने की हालत में नहीं थे।

रवि का दोस्त संजय भी पूछताछ में बुलाया गया। वो काफ़ी नर्वस था।

“मुझे लगता है रवि ने ही किया होगा। उसका पागलपन अलग ही लेवल का था,” उसने कहा।

पड़ोसियों ने बताया कि रमेश और प्रमिला के बीच कुछ दिन पहले ज़ोरदार झगड़ा हुआ था। रमेश के पास कोई ठोस अलिबी नहीं था, तो पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया।

लेकिन मामला तब पलटा जब फॉरेंसिक रिपोर्ट में प्रमिला के नाखूनों और कपड़ों पर किसी और का DNA मिला। सबके सैंपल लिए गए।

कुछ दिन बाद, सच्चाई सामने आई।

DNA मैच हुआ—संजय से।

पुलिस स्टेशन में संजय टूट गया।

“उस रात मैं चुपके से प्रमिला के घर गया था, मास्क पहन के… जब उन दोनों का सीन चल रहा था, मैं वीडियो बना रहा था। दोनों को साथ नहीं देख पा रहा था, जलन इतनी बढ़ गई कि मैं अलमारी से निकला और लोहे की रॉड से रवि के सर पर मारा। फिर प्रमिला को समझाया कि मेरी हो जा। लेकिन साली मानी नहीं। जबरदस्ती में मेरा मास्क गिर गया। उसने मुझे पहचान लिया। डर के मारे… उसे भी उसी रॉड से मार दिया।”

रवि तो डर के मारे भाग गया था, और उसके ज़ख्म संजय से हुई हाथापाई के थे।

रमेश की बात आख़िरकार सही साबित हुई—वो उस रात नशे में धुत्त होकर गटर में गिर पड़ा था। पास के शराब की दुकान के CCTV ने उसकी बात को सही साबित कर दिया।